Tuesday, January 20, 2009

वो शख़्स बड़ा दीवाना निकला

जिसको सुनने सारा ज़माना निकला
वो मेरी मुहब्बत का फ़साना निकला

धड़कता था जो सबके दिलों में हरदम
मेरे ही लबों का एक तराना निकला

आते ही दिया पैग़ाम चले जाने का
ये मुझको जुदा करने का बहाना निकला

क़त्ल हुआ मेरा, शोर न मचा क्योंकि
मेरा क़ातिल मेरा यार पुराना निकला

औरों को ख़ुशी दे, ख़ुद ग़म ही समेटे था
इस दौर में वो शख़्स बड़ा दीवाना निकला

ग़म जो मिले निर्मल से तो अचानक बोले
यार, तुमसे तो बरसों का याराना निकला

2 comments:

  1. औरों को ख़ुशी दे, ख़ुद ग़म ही समेटे था
    इस दौर में वो शख़्स बड़ा दीवाना निकला

    --वाह वाह!! बहुत खूब. दाद कबूलें.

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